दिगंबर शब्द का अर्थ है अंबर (आकाश/दिशाएं) को
वस्त्र सामान धारण करने वाला।
दुसरे किसी वस्त्र के आभाव में इसका अर्थ
( या शायद अनर्थ ) यह भी निकलता है कि
जो वस्त्र हिन हो (अथवा नग्न हो)।
सही अर्थों में दिगंबर शिव के सर्वव्यापत चरीत्र
की ओर इंगित करता है।
शिव ही संपूर्ण ब्रह्माण्ड में व्याप्त हैं।
यह अनंत अम्बर शिव के वस्त्र सामान हैं।

शिव का एक नाम व्योमकेश भी है जिसका अर्थ है जिनके बाल आकाश को छूतें हों।
इनका यह नाम एक बार फिर से उनके सर्वव्यापक चरीत्र की ओर ही इशारा करती है।

शिव सर्वेश्वर हैं। सर्वशक्तिमान तथा विधाता होने के बाद भी वे अत्यंत ही सरल हैं – भोलेनाथ हैं।
वे शिघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। उन्हें प्रसनन करने के लिए किसी जटील विधान अथवा आडंबर की आवश्यकता नहीं पड़ती। वे तो भक्ति मात्र देखतें हैं।
कोई भी किसी मार्ग द्वारा शिव को प्राप्त कर सकता है।

शिव देवाधिदेव हैं, पर उनमें कोई आडंबर नहीं है,
वे सरल हैं, वस्त्र के स्थान पे बाघंबर,
आभुषण के नाम पर सर्प और मुण्ड माल,
श्रृंगार के नाम भस्म यही उनकी पहचान है|
श्री महादेव योग मुद्रा में
कैलाश पर्वत पर योग में नित निरत रहते हैं,
भक्तों के हर प्रकार के प्रसाद को ग्रहण करने वाले महादेव
बिना किसी बनावट और दिखावा के होने के कारण
दिगंबर कहे जाते हैं|

ॐ नमः शिवाय 🌿
हर हर महादेव 🔱

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